होम लोन और संपत्ति बिक्री: अपने लाखों बचाएं! Tax Saving Guide 💰
प्रॉपर्टी खरीदना सिर्फ निवेश नहीं, यह टैक्स बचाने का भी सबसे बड़ा जरिया है! जानें होम लोन और संपत्ति बेचने पर आपको क्या-क्या फायदे मिलते हैं।
A. होम लोन लेने वाले को मिलने वाले टैक्स फायदे (धारा 24 और 80C) 🏡
1. हाउसिंग लोन के ब्याज पर कटौती (धारा 24)
- खुद के रहने वाली प्रॉपर्टी (Self-Occupied): इस पर चुकाए गए ब्याज पर आप ₹2,00,000/- तक की कटौती का दावा कर सकते हैं, जिससे आपकी कर योग्य आय कम होती है।
- किराए पर दी गई प्रॉपर्टी (Rented Property): इसमें ब्याज की पूरी राशि कटौती के रूप में मान्य होती है, हालाँकि 'हाउस प्रॉपर्टी से नुकसान' को सेट ऑफ करने की एक सीमा (₹2 लाख) है।
- निर्माण अवधि का ब्याज: प्रॉपर्टी बनने से पहले चुकाए गए ब्याज की कटौती 5 वर्षों में, उस वर्ष से शुरू होकर, जिसमें निर्माण पूरा हुआ हो, समान किस्तों में मिलती है।
2. होम लोन के मूलधन (Principal) की कटौती (धारा 80C)
- कटौती की सीमा: हाउसिंग लोन के मूलधन की चुकौती धारा 80C के तहत ₹1,50,000/- की समग्र सीमा के भीतर कटौती के लिए योग्य है।
- अन्य लागतें: इस सीमा में प्रॉपर्टी के स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य हस्तांतरण शुल्क भी शामिल होते हैं, बशर्ते घर 5 साल तक बेचा न जाए।
3. पहली बार घर खरीदने वालों के लिए अतिरिक्त लाभ (अतिरिक्त धाराएँ) ✨नया!
- किराए के भुगतान पर कटौती (धारा 80GG): यदि आपको HRA नहीं मिलता है और आप किराए के घर में रहते हैं, तो आप ₹5,000 प्रति माह या उससे अधिक की कटौती का दावा कुछ शर्तों पर कर सकते हैं।
- किफायती आवास पर ब्याज कटौती (धारा 80EE/80EEA): पहली बार घर खरीदने वाले कुछ शर्तों के तहत अतिरिक्त ब्याज कटौती का दावा कर सकते थे (जो वर्तमान में सक्रिय नहीं हैं)।
B. संपत्ति बेचने पर पूंजीगत लाभ (Capital Gain) में राहत 🛡️
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत लंबी अवधि की पूंजीगत संपत्तियों के हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले टैक्स से राहत के कई प्रावधान हैं।
1. आवासीय घर की बिक्री पर LTCG से राहत (धारा 54)
- छूट की शर्त: यदि आप 24 महीने (वर्तमान नियम) से अधिक समय तक रखे गए आवासीय घर को बेचते हैं, तो लाभ पर छूट मिलती है।
- निवेश का विकल्प: प्राप्त पूंजीगत लाभ को नई आवासीय संपत्ति खरीदने (बिक्री से 1 वर्ष पहले या 2 वर्ष बाद) या निर्माण (बिक्री से 3 वर्ष के भीतर) में निवेश करने पर छूट मिलती है।
- CGAS में जमा: यदि आप रिटर्न फाइल करने की नियत तारीख तक राशि का उपयोग नहीं कर पाते हैं, तो लाभ को "पूंजीगत लाभ खाता योजना" में जमा करना अनिवार्य है।
2. अन्य पूंजीगत संपत्ति की बिक्री पर राहत (धारा 54F)
- छूट की शर्त: आवासीय घर के अलावा किसी भी अन्य दीर्घकालिक संपत्ति (जैसे जमीन, गोल्ड) को बेचने से हुए LTCG पर यह धारा लागू होती है।
- निवेश का विकल्प: पूंजीगत लाभ को एक नए आवासीय घर को खरीदने/निर्माण में निवेश करने पर LTCG पर छूट मिलती है।
- महत्वपूर्ण शर्त: इस छूट का दावा करने के लिए, आपके पास बेचे गए घर के अलावा एक से अधिक आवासीय घर नहीं होना चाहिए।
3. निर्दिष्ट बॉन्ड्स में निवेश करके राहत (धारा 54EC)
- छूट की शर्त: किसी भी दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्ति की बिक्री से हुए LTCG को राहत देने के लिए यह एक सरल तरीका है।
- निवेश का तरीका: पूंजीगत लाभ को बिक्री की तारीख से 6 महीने के भीतर NHAI या REC जैसे अधिसूचित बॉन्ड्स में निवेश करना होता है।
- अधिकतम सीमा: इस बॉन्ड में निवेश की अधिकतम सीमा ₹50 लाख है, जिसका लाभ हर वित्तीय वर्ष में लिया जा सकता है।
4. दीर्घकालिक पूंजीगत हानि (LTCL) का समायोजन ✨नया!
- सेट ऑफ का नियम: LTCG से हुए किसी भी लाभ को उसी वर्ष के दौरान हुई दीर्घकालिक पूंजीगत हानि (LTCL) से समायोजित (सेट ऑफ) किया जा सकता है।
- आगे ले जाना: यदि LTCL पूरी तरह से समायोजित नहीं होता है, तो इसे 8 वित्तीय वर्षों तक आगे (Carry Forward) ले जाया जा सकता है, ताकि भविष्य में होने वाले LTCG से इसे घटाया जा सके।
"समझदार निवेशक वह नहीं है जो सिर्फ पैसा कमाता है, बल्कि वह है जो जानता है कि कानूनी तौर पर इसे कैसे बचाना है।" - अज्ञात
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह सामग्री केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। आयकर अधिनियम 1961 के तहत बताई गई कटौती सीमाएँ (जैसे धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख, धारा 24 के तहत ₹2 लाख) समय-समय पर सरकारी बजट और अधिनियमों द्वारा बदली जाती हैं और इसमें लागू उपकर (Cess) या अधिभार (Surcharge) शामिल नहीं है। कोई भी टैक्स फाइलिंग या निवेश निर्णय लेने से पहले, आपको नवीनतम कर कानूनों के लिए हमेशा एक योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से परामर्श लेना चाहिए।

